1. शिशु-जन्म –
अजवाईन और हर्ड गुनगुना पानी मिलाकर घुट्टी के रूप में पिलायें,
2. कब्जी –
शिशु को कब्ज हो तो बड़ी हर्ड ( जो साधारण हर्ड से बहुत बड़ी होती हे तथा जिसे लोग काबुली हर्ड बोलते हें ) जरा सी घिसकर, जरा सा काला नमक गर्म पानी में मिलाकर पिला दें, यह उत्तम पाचक हे,
3. शिशु-दूध-पाचन –
बच्चों के लिए माता का दूध सबसे अच्छा हे, माँ का दूध रोग प्रतिरोधक शमता बढ़ाता हे, और शरीर को सुंदर बनाता हे, माता का संयमी जीवन ही बच्चों को निरोग रखता हे, स्त्री का पुरुष संग के समय और तुरंत बाद बच्चों को दूध नही पिलाना चाहिए, इससे बच्चे के शरीर में गर्मी चली जाती हे, इसी प्रकार जब क्रोध आया हो तो बच्चों को दूध न पिलायें, दूध पिलाने से 15 मिनट पहले यदि माँ एक गिलास पानी पीले, फिर दूध पिलाने से माँ का दूध शीघ्र पच जाता हे, तथा बच्चे को दस्त आदि नही होती,
4. शिशुओं की उलटी –
निम्बू के रस की कुछ बुँदे पानी में मिलाकर पिलायें फिर शिशु दूध नही उलटेगा,
5. दस्त –
छोटे बच्चों को दस्त हो तो गर्म दूध में चुटकी भर पीसी दालचीनी डालकर पिलायें,
6. बच्चों को दूध से घिरणा –
यदि बच्चा दूध नही पिता हे तो बच्चे को दूध नही पिलायें, दूध के स्थान पर दही, लस्सी, दूध से बनी अन्यें चीजें, खीर आदि दें, कुछ सप्ताह बाद बच्चा दूध पिने लगेगा, बच्चे के भोजन में परिवर्तन करते रहना चाहिए, केले को पीसकर दूध में मिलाकर दे सकते हें,
7. बच्चों के रोग –
पेट फूलना, दस्त, खांसी, सर्दी, जुकाम, उलटी, तुलसी के पत्तों का रस, और चीनी व् पानी मिलाकर शरबत बनालें, इसकी एक छोटी चमच पिलायें, ये सब रोग ठीक हो जायेंगे, नियमित प्रयोग से बच्चा स्वस्थ रहता हे,
8. बच्चों का दुबलापन –
बच्चों को रोज गाजर का रस पिलाने से वो हस्ट पुष्ट बनते हें,
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